सॉफ्टवेयर :- कम्प्यूटर सिस्टम के वैसे भाग जिसे हम देख सकते है, महसूस क्र सकते है लेकिन छू नहीं सकते है और यह एक प्रोग्राम होता है जिसे ओपन करके किसी भी तरह का वर्क किया जा सकता है। जैसे :- फेसबुक , फोटोशॉप , टैली , वर्ड , एक्सेल इत्यादि।
सॉफ्टवेयर दो प्रकार के होते है :-
1 . सिस्टम सॉफ्टवेयर
2 . एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर
1. सिस्टम सॉफ्टवेयर : - वैसा सॉफ्टवेयर जो सिस्टम में पहले से इनस्टॉल किया हुआ रहता है और उसे डिलीट नहीं किया जा सकता है। यह सिस्टम का प्रोग्राम होता है जैसे :- ऑपरेटिंग सिस्टम , लैंग्वेज ट्रांसलेटर , यूटिलिटी प्रोग्राम इत्यादि।
a). ऑपरेटिंग सिस्टम : - ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो सिस्टम को ऑपरेट करता है ऑन - ऑफ करने में हेल्प करता है सिक्योरिटी मॅनॅग्मेंट में हेल्प करता है और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को रन करने में भी हेल्प करता है।
b). लैंग्वेज ट्रांसलेटर :- लैंग्वेज ट्रांसलेटर भी एक सियतीम सॉफ्टवेयर है जो ह्यूमन लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज में ट्रांसलेट करता है।
लैंग्वेज ट्रांसलेटर तीन प्रकार के हॉट है :-
१. इंटरप्रेटर :- इंटरप्रेटर भी एक लैंग्वेज ट्रांसलेटर है जो सौरसे कोड को मशीन लैंग्वेज में ट्रांसलेट करता है
२. कम्पाइलर :- कम्पाइलर भी एक लैंग्वेज ट्रांसलेटर है जो हाई लेवल लैंग्वेज को मशीन लंगगी में ट्रांसलेट करता है.
३. असेम्बलर :- असेम्बलर भी एक लैंग्वेज ट्रांसलेटर है जो अस्सेम्ब्ली लैंग्वेज और हाई लेवल लैंग्वेज को मशीन लैंग्वेज में ट्रांसलेट करता है।
c). यूटिलिटी प्रोग्राम :- यूटिलिटी प्रोग्राम एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो सिस्टम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को मैनेज करने में हेल्प करता है और सिस्टम के सॉफ्टवेयर और एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर को भी मैनेज करती है। तथा सिस्टम को बूट एवं रिबूट करने में हेल्प करता है।
2. एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर : वैसा सॉफ्टवेयर जो यूजर के द्वारा खुद से इनस्टॉल किया जाता है और उसे जब चाहे तब अनइंस्टाल किया जा सकता है। जैसे फेसबुक , व्हाट्सप्प, एक्सेल , वर्ड, फोटोशॉप, इत्यादि।
ये दो प्रकार के होते है
१ नार्मल सॉफ्टवेयर
२ स्टैण्डर्ड सॉफ्टवेयर
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